Bhagat Singh History in Hindi

Bhagat Singh History in Hindi : शहीद भगत सिंह भारत के एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया इनका जन्म 28 सितंबर 1960 को पंजाब प्रांत के एक सिख परिवार में बंगा गांव के लायलपुर जिला में हुआ था। इनके पिता का नाम किशन सीता माता का नाम विद्यावती कौर था। इनके पिता किसान से यह तथा चाचा अजीत सिंह की स्वतंत्रता सेनानी थे यही कारण के कारण है , कि भगत सिंह की स्वतंत्रता सेनानी बनने की ओर आकर्षित हुआ। भगत सिंह ने भारत की स्वतंत्रता के लिए “नौजवान भारत” सभा की स्थापना की थी।

Bhagat Singh History in Hindi
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स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इन्होंने बहु प्रसिद्ध ने मारा “इंकलाब जिंदाबाद” दिया। भगत सिंह ने 17 दिसंबर 1927 के दौरान अंग्रेज अधिकारी जेपी सोडास का हत्या कर दिया था 23 मार्च 1931 को भगत सिंह को सुखदेव थापर कथा शिवराम राजगुरु को फांसी दी गई। भारत में प्रत्येक वर्ष 23 मार्च का शहीद मना कर उसे असीम योगियों के याद में किया जाता है अपने इस योगदान के लिए सभी भारत वासियों को शहीद भगत सिंह तथा उनके वहां साथियों पर गर्व है।

सरदार भगत सिंह युवा भारतीय क्रांतिकारी थे जिन्हें शहीद भगत सिंह कहां जाता है। उन्हें भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे प्रभावशाली क्रांतिकारी में से एक माना जाता है। अमर शहीदों में सरदार भगत सिंह का नाम सबसे प्रमुख रूप से लिया जाता है। “इंकलाब जिंदाबाद”का इनका नारा ने युवाओं पर स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान काफी प्रभाव डाला था। भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1960 को पंजाब के लालपुर जिला में बंगा गांव के एक सिख परिवार में हुआ था। जो अब पाकिस्तान में है उन्हें पिता का नाम सरदार किशन सिंह था और माता का विद्यावती कौर था।

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उनके दादा अर्जुन सिंह पिता की शान से और चाचा अजीत सिंह और स्वर्ग सिंह स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय थे। 1916 में भगत सिंह D.A.V स्कूल में अध्ययन करते हुए लाहौर में कुछ प्रसिद्ध राजनीतिक नेता और से लाला लजपतराय और रासबिहारी बोस के संपर्क में आए उस समय भगत सिंह 9 साल के थे यहां उनके राष्ट्रीयता की भावना को काफी बल मिला स्कूल की पढ़ाई के साथ-साथ वे क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लेने लगे 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर में जलियांवाला बाग हत्याकांड का भगत सिंह पर गहरा असर हुआ और वह इस ब्रिटिश क्रूरता को सहन नहीं कर सके भगत सिंह दूसरे दिन वहां जाकर एक ब्रिटिश ऑफिसर का खून से सनी मिट्टी ले आए थे।

लाहौर के राष्ट्रीय कॉलेज से अध्ययन छोड़ने के बाद भगत सिंह ने भारत के स्वतंत्र कार्य के लिए नौजवान भारत सभा की स्थापना की। 1929 भगत सिंह और उनके सहयोगियों ने मिलकर दिल्ली के केंद्रीय विधानसभा में बम फेंका और नारा लगाया इंकलाब जिंदाबाद अंग्रेजों का नाश को सपोर्ट करने के बाद वह से भाग्य नहीं बल्कि अपने भागीदारी कबूल ते हुए पुलिस ने आत्मसमर्पण कर दिया 23 मार्च 1921 को भगत सिंह और उनके दो साथियों के साथ साथ राजगुरु और सुखदेव को फांसी पर लटकाया गया जब भगत जी को मौत की सजा सुनाई गई थी उस समय वह सिर्फ 23 साल के थे इसके बाद भारत के लोगों ने भारत सिंह को “शहीदे—ए— आजम” का नाम दिया। जिन्होंने देश की आजादी के लडाई में अपने प्राणों का बलिदान हंसते-हंसते दे दिया था।

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भगत सिंह का जन्म 28 दिसंबर 1960 को पंजाब में हुआ था यह एक सिख परिवार में ताल्लुक रखते हैं इसके पिता का नाम सरदार किशन सिंह था मैं भी एक स्वतंत्र सेनानी थे। इनकी माता का नाम विद्यावती कौन था यहां एक स्वतंत्रता सेनानी साथ-साथ लेखक भी थे। भगत सिंह ने भारत के आजादी के लिए नौजवान भारत सभा को स्थापना की यह वामपंथी विचारधारा से प्रभावित थे यहां एक भारत के महान क्रांतिकारी थे। इन्होंने आजादी के लिए कई सारे नारे भी लगाए थे उसमें से एक है ।”इंकलाब जिंदाबाद”।

कई महापुरुषों ने हमारी आजादी की लड़ाई में अपने तन मन धन परिवार सब कुशल अर्पण कर दिया ऐसे ही महापुरुषों में से एक थे शहीद भगत सिंह इस महापुरुष का जन्म 28 सितंबर सन 1960 को पंजाब में हुआ था उनके पिता का नाम किसान चाहिए और उसके माता का नाम विद्यावती कौर था। उनके परिवार के कहीं सदस्य सक्रिय रूप में भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष में शामिल थे अपने परिवार के सदस्यों से मैं बेहद प्रेरित हुए और देशभक्ति की भावना उनमें घर कर गई।

भगत जी 14 वर्ष की आयु से ही पंजाब की क्रांतिकारी संस्थाओं में कार्य करने लगे थे देशभक्ति की भावना इन में कूट-कूट कर करी थी। भगत सिंह का नाम अमर शहीदों में सबसे प्रमुख रूप में लिया जाता है भगत सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई लड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी उनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य देश को आजाद करना था। भगत सिंह ने भारत के आजादी के लिए हिंदुस्तान रिपब्लिकन के एसोसिएशन के संस्था के वाला बाग हत्याकांड की वजह से अब फ़क़त से बेहद परेशान थे इनको जीवन का महत्वपूर्ण मोड स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राई का मौत का बदला लिया।

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उन्होंने अधिकारी की हत्या की और केंद्रीय विधानसभा में बम फेंकने की योजना बनाई इन घटनाओं को अंजाम तक पहुंचाने के बाद उन्होंने आत्मसमर्पण किया। तेल में भगत सिंह करीब 2 साल तक रहे थे जेल में भगत सिंह व उनके साथियों ने 64 दिनों तक भूख हड़ताल कि थी। भगत जी ने भारत को आजादी के लिए “इंकलाब जिंदाबा”का नारा दिया था।

23 मार्च 1931 को उनको और उनके साथ ही राजगुरु और सुखदेव को फांसी की सजा दी गई भगत सिंह सिर्फ 23 साल के थे जब उन्होंने खुशी-खुशी देश के लिए अपना बलिदान दे दिया। जॉब इन तीनों वीरों को फांसी दी जा रही थी तो उनके चेहरे पर जरा सा भी भाई नहीं था उनकी मृत्यु का ही भारतीयों को लिए स्वतंत्रता के संघर्ष में शामिल होने के लिए एक प्रेरणा साबित हुई। उनकी वीरता की कहानियां आज भी युवकों की प्रेरणा करती है जिन्होंने उनकी जिंदगी और जवानी भारत मां के लिए कुर्बानकर दी।

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भगत सिंह भारत की स्वतंत्रता के इतिहास में सबसे प्रभावशाली क्रांतिकारियों में से एक है उन्होंने न केवल जीवित रहते हुए स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई बल्कि अपनी मृत्यु के बाद भी कई अन्य युवकों को इसमें शामिल होने के लिए प्रेरित किया। प्रारंभिक जीवन भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1960 में पंजाब के जिला लायलपुर में बंगा गांव अभी पाकिस्तान में है एक सिख परिवार में हुआ था उनके पिता का नाम सरदार किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती कौर था।

शिक्षा भगत सिंह बचपन से ही मेधावी थे भगत सिंह 14 साल की आयु से ही पंजाब की क्रांतिकारी संस्थाओं में कार्य करते थे सन 1923 में भगत सिंह ने इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की अमृतसर में 13 अप्रैल 1919 को हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड में भगत सिंह की सोच पर इतना गहरा प्रभाव डाले कि लाहौर के नेशनल कॉलेज की पढ़ाई छोड़ कर भगत सिंह ने भारत की आजादी की नौजवान भारत सभा की स्थापना की कालिया वाला बाग का नरसंहार के बाद लाला लाजपत राय की मृत्यु की वजह से भगत सिंह को गहरा आघात पहुंचा लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए भगत सिंह ने उनके दोस्तों ने जॉन सोर्ड्स की गोलियों से बूंदी इन्होंने केंद्रीय संसद में बम फेंका इनके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

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23 मार्च 1931 को भगत सिंह और राजगुरु और सुखदेव के साथ-साथ फांसी दे दी गई भगत सिंह भारत के 1 प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे उन्होंने देश की आजादी के लिए जिस साहस का परिचय दिया वहां आज के युवकों के लिए एक बहुत बड़ा आदर्श है जिसका कारण उनका अमर शहीदों में सबसे प्रमुख रूप से लिया जाता है।

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