भ्रष्टाचार पर निबंध | Corruption Essay in Hindi

प्रस्तावना :

भ्रष्टाचार पर निबंध :भ्रष्टाचार का शाब्दिक अर्थ है भ्रष्ट + आचार । भ्रष्ट यानी बुरा या बिगड़ा हुआ तथा आचार का मतलब है आचरण । अर्थात वह आचरण जो किसी भी प्रकार से अनैतिक और अनुचित हो उसे भ्रष्टाचार कहते हैं। जो की आज की सबसे गंभीर समस्या बन गई है। आज हम इसी मुद्दे पर माहिती निबंध के रूप देने वाले है।

निबंध 1

भ्रष्टाचार शब्द भ्रष्ट और आचार शब्द से मिलकर बना है I जहा भ्रस्ट का अर्थ है बुराई या बिगड़ा हुआ और अचार का अर्थ है अचारण अर्थात भ्रस्टाचार शब्द का अर्थ यह है कि ऐसा आचरण जो किसी प्रकार से अनैतिक ओर अनुचित हो I

भ्रष्टाचार पर निबंध | Corruption Essay in Hindi
भ्रष्टाचार पर निबंध | Corruption Essay in Hindi

हमारे देश में भ्रष्टाचार दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, यह हमारे समाज और राष्ट्र के सभी अंगों बहुत गम्भीरता पूर्वक प्रभावित किए जा रहा है I समाज, धर्म, राजनीति, संस्कृति, साहित्य दर्शन, उद्योग, प्रशासन आदि में भ्रस्टाचार आज इतनी अधिकता बढ़ रहा है कि इससे मुक्ति मिलना बहुत कठिन लग रहा है I चारो और दुराचार, व्याभिचार, अनाचार, अत्याचार आदि सभी कुछ भ्रष्टाचार के ही अवयव प्रतीत होते है I इन्हें हम अलग अलग नामों से जानते है लेकिन वास्तव ये सब भ्रस्टाचार की जड़े ही है I

भ्रस्टाचार के कयी कारण हो सकते है I भ्रस्टाचार में असंतोष एक मुख्य कारण है I जब किसीको कुछ अभाव होता है और उसे वह जल्दी प्राप्त करने की इच्छा होती है तब वह भ्रष्ट अचारण अपनाने के लिए विवश हो जाता है I भ्रस्टाचार का दूसरा बड़ा कारण है लोभ-लालच I अन्याय और निष्पक्षता के अभाव में भी भ्रस्टाचार का जन्म होता है I इसी प्रकार जातीयता, द्वेष, भाषावाद, साम्प्रदायिकता आदि के फल स्वरुप भ्रस्टाचार का जन्म होता है I इससे चोरी, दलबदल, रिश्वत खोरो आदि अवस्थाएं प्रकट होती है I

भ्रस्टाचार के दुष्प्रभाव समाज और राष्ट्र में व्यापक रूप से असमानता और अव्यवस्था का उदय होता है I इससे ठीक प्रकार से कोई कार्यपद्धति चल नहीं पाती है और सभी के अंदर भय, आक्रोश और चिंता की लहरे उठने लगती है I भ्रस्टाचार के वातावरण मे ईमानदारी और सत्यता समाप्त हो जाते है बल्कि इसके स्थान पर सही वातावरण का निर्माण करना आज प्रत्येक राष्ट्र के लिए लोहे के चने चबाने के समान कठिन हो गया है I

भ्रष्टाचार पर निबंध | Corruption Essay in Hindi
भ्रष्टाचार पर निबंध | Corruption Essay in Hindi

भ्रस्टाचार की जड़ों को समाप्त करने के लिए सबसे पहले यह आवश्यक है कि हम इसके दोषी तत्वो को इसी कड़ी से कड़ी सजा दे की दूसरा भ्रष्टाचारी फिर सिर न उठा सके । इसके लिए सबसे सही और सार्थक कदम होगा प्रशासन को सख्त और चुस्त बनना होगा I न केवल सरकार अपितु सभी सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं समाज और राष्ट्र के ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ, सच्चे सेवक, मानवता एवं नैतिकता के पुजारी को प्रोत्साहन देकर भ्रष्टाचारियो के हीन मनोबल को तोड़ना चाहिए I इससे सच्चाई, कर्तव्य परायणता और कर्म निष्ठ की यह दिव्य ज्योति जल सकेगी I जो भ्रस्टाचार के अन्धकार को समाप्त करके सुन्दर प्रकाश करने में समर्थ सिद्ध होगी I

निबंध 2

भ्र्ष्टाचार का मतलब है देश या समाज को नुकसान करने वाला काम। अक्सर लोग लालच में आकर अनुचित काम कर बैठते है जो की दुसरो के लिए अर्थात देश को नुकसान पहुंचाता है और ऐसे लोगो को भ्रष्टाचारी कहते है।

किसी भी देश के विकास के रास्ते में उस देश की समस्याए बहुत ही बड़ी बाधाए होती है। इन सभी समस्याओ में सबसे प्रमुख समस्या है “भ्र्ष्टाचार की समस्या।” जिस राष्ट्र या समाज में भ्रष्टाचार का दीमक लग जता है तो वह समाज ऋषि रूपी वृक्ष अंदर से बिलकुल खोखला हो जाता है, और उस समाज व राष्ट्र का भविष्य अंधकार से घिर जाता है।

भ्रष्टाचार पर निबंध | Corruption Essay in Hindi
भ्रष्टाचार पर निबंध | Corruption Essay in Hindi

आज “सोने की चिड़िया” कहलाने वाले भारत देश में भ्रष्टाचार अपनी जड़े फैला रहा है। आज भारत में ऐसे कई व्यक्ति मौजूद है जो भ्रष्टाचारी है। भ्रष्टाचार के कई रंग-रूप है जैसे रिश्वत, काला-बाजारी, जानबूझकर डैम बढ़ाना, पैसा लेकर काम करना, सस्ता सामान लाकर महंगा बेचना आदि। भारत देश में आज के समय में लगभग सभी प्रकार की आईटी कंपनिया है, बड़े कार्यालय है, अच्छी अर्थव्यवस्था है, इसके बावजूद भी भारत आज पूरी तरह से विकसित होने की दौड़ में बहुत पीछे है। इसका सबसे बड़ा कारण भ्रष्टाचार ही है।

भ्रष्टाचार का एक मुख्य कारण है लोगो के मन में स्वार्थ की प्रवृति। बात चाहे एक व्यक्ति की हो या फिर किसी समाज या संप्रदाय की, लोगो में निजी स्वार्थ की भावना परस्पर असमानता को जन्म देती है। भ्रष्टाचार का दूसरा मुख्य कारण है लालच। इंसान के पास चाहे जितना भी हो उसमे और धन पाने का लालच हमेशा रहता है और इसी लालच की वजह से वो गलत काम कर बैठता है ,जो की भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है। इन सबके अलावा भी भ्रष्टाचार के और भी कई कारण है , जैसे – भाई भतीजावाद, जातिवाद, साम्प्रदायिकता, भाषावाद, अमीरो और गरीबो में अन्तर आदि।

भ्रष्टाचार का प्रभाव न केवल एक आदमी पर बल्कि पुरे देश पर पड़ता है। देश पैसा उसकी प्रगति में लगने बजाय गलत हाथो में चला जाता है। भ्रष्टाचार के कारण अमीर ओर अमीर और गरीब ओर भी गरीब होते चले जाते है। भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सख्त कानून और दंड की व्यवस्था की जनि चाहिए। आज के समय में दंड की व्यवस्था इतनी कमजोर हो गयी है की अगर कोई व्यक्ति रिश्वत लेता पकड़ा जाता है तो दंड से बचने के लिए रिश्वत देकर बच जाता है।

भ्रष्टाचार पर निबंध | Corruption Essay in Hindi
भ्रष्टाचार पर निबंध | Corruption Essay in Hindi

ऐसी स्तिथि में भी भ्रष्टाचार को बहुत बढ़ावा मिलता है। यह बात सपष्ट है की जब तक भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म नहीं किया जायेगा तब तक राष्ट्र उन्नति नहीं कर सकता है। भ्रष्टाचार खत्म करना केवल सरकार का ही नहीं बल्कि हम सब का कर्तव्य बनता है। आज के समय हम सभी को एक साथ मिलकर भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए प्रयास करने चाहिये।

अगर हम सब अपने आप से एक प्रण लें की हम किसी भी प्रकार का गलत लम नहीं करेंगे या कोई भी ऐसा कर्त नहीं करेंगे की जो अनुचित हो या देश के लिए ख़राब जायेगा और हमारा भारत फिर से “सोने की चिड़िया” कहलाने लगेगा। इसके लिए हम सबको यह प्रण लेना होगा –

“तिरंगा शान से लहरायेंगे,
भारत को भ्रष्टाचार से मुक्त बनायेंगे।”

निबंध 3

भ्रष्टाचार का शाब्दिक अर्थ है भ्रष्ट आचरण रेसा कार्य जो अपने स्वार्थ सिद्धि की कामना के लिए समाज के नैतिक मूल्यों को ताख पर रखकर किया जाता है , भ्रष्टाचार कहलाता है । भ्रष्टाचार पूरे देश में महामारी की तरह फैल रहा है । यह दीमक की तरह पूरे देश को धीरे – धीरे खतम कर रहा है । पूरे भारत के व्यवस्था प्रणाली में भ्रष्टाचार ने अपनी जगह बना ली है । लोग सत्य के मार्ग पर तरक्की पाने के जगह भ्रष्ट नीतियों को अपनाते हैं ।

भ्रष्टाचार पर निबंध | Corruption Essay in Hindi
भ्रष्टाचार पर निबंध | Corruption Essay in Hindi

पूरे भारत के अर्थ-व्यवस्था में अपनी जगह बना ली है । लोग सत्य के मार्ग पर तरक्की पाने के जगह भ्रष्ट नीतियों को अपनाते हैं । उदाहरण के तौर पर किसी दफ्तर में प्रमोशन चाहिए या नौकरी चाहिए तो वह रिश्वत देकर अपना काम करवाते हैं । यह न्याय व्यवस्था के खिलाफ़ है । आज कल विडंबना यह है कि अगर लोग रिश्वत लेने या देने के जुर्म में पकड़े भी जाते है, तो रिश्वत देकर छूट भी जाते है ।

भ्रष्टाचार के लिए ज्यादातर हम देश के राजनेताओ को जिम्मेदार मानते है पर सच यह है कि देश का आम नागरिक भी भ्रष्टाचार के विमिन्न स्वरूप में भागीदार है। आज भारत में भ्रष्टाचार हर क्षेत्र में बढ़ रहा है , कालाबाजारी – जानबूझकर चीज़ों के दाम बढ़ाना , अपने स्वार्थ के लिए चिकित्सा जैसे क्षेत्र में भी जानबूझकर गलत ऑपरेशन करके पैसे हैठना , हर काम पैसे लेकर किसी भी सामान को सस्ते में लाकर महरों में बेचना, चुनाव में ईमानदारी न रखना, चोरी करना, ब्लैकमेल करना, परीक्षा में नकल, परीक्षार्थी का गलत मूल्यांकन करना, , हफ्ता वसूली , न्यायधीशों द्वारा पक्षपात होना पूर्ण निर्णय न होना , वोट के लिए पैसे और शराब बाटना , पैसे लेकर रिपोर्ट छापना , यह सब भ्रष्टाचार हे और यह दिन – ब – दिन भारत के अलावा अन्य देशों में भी बढ़ रहा है । आज पूरी दुनिया में भारत भ्रष्टाचार के मामले में नौ वें स्थान पर है ।

भ्रष्टाचार पर निबंध | Corruption Essay in Hindi
भ्रष्टाचार पर निबंध | Corruption Essay in Hindi

भारत में भ्रष्टाचार ने इस कदर अपनी जगह बना ली है कि लोगों की मानसिकता ही रिश्वत लेना और देना बन गया है जबकि रिश्वत लेना और देना दोनों कानून की नज़रों में जुर्म है। भ्रष्टाचार का उदाहरण हाल ही में कोरोना महामारी के दौरान देखने को मिला है जहाँ पूरा विश्व कोरोना के मय में था वहीं कुद्द चिकित्सा क्षेत्रों ने इसे ओर भड़काने का काम किया । उन्होंने मनमानी फीस ली , गलत कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट बनाई । कोरोना महामारी के दौरान भ्रष्टाचार ने अपना क्षेत्र और भी व्यापक कर लिया है।

भ्रष्टाचार के कारण :

  • जब किसी को किसी भी चीज़ के अभाव के कारण कष्ट होता हे तो वह भ्रष्ट आचरण करने के लिए विवश हो जाता है।
  • असमानता , आर्थिक , सामाजिक या सम्मान , पद – प्रतिष्ठा के कारण भी व्यक्ति अपने आपको भ्र्ष्ट बना लेता है।
  • मनुष्य को जल्दी आगे बढ़ने की चाह , ज्यादा पैसे कमाने की चाह और लालच।
  • कठोर कानून का न होना।
  • भ्रष्टाचार को रोकने का उपाय :

जब तक इस अपराध के लिए कोई बड़ा दंड नहीं दिया जाता तब तक यह बिमारी दीमक की तरह पूरे देश को खा जाएगी । लोगों को स्वयं में ईमानदारी विकसित करनी होगी। आने वाली पीढ़ी तक सुआचरण के फायदे पहुंचाने होगे ।

  • भ्रष्टाचार विरोधी दिवस :
भ्रष्टाचार पर निबंध | Corruption Essay in Hindi
भ्रष्टाचार पर निबंध | Corruption Essay in Hindi

दुनियाभर में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए दिसम्बर को अंतराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ३१ अक्टूबर २००३ को एक प्रस्ताव पारित कर अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस मनाए जाने की घोषणा की ।

  • उपसंहार :

भ्र्ष्टाचार हमारे नैतिक जीवन मूल्यों पर सबसे बडा प्रहार है। भ्रष्टाचार से जुड़े लोग अपने स्वार्थ में अंधे होकर राष्ट्र का नाम बदनाम कर रहे है। अतः यह बेहद ही आवश्यक है कि हम भ्रष्टाचार के इस जहरीले साँप को कुचल डालें । साँप को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाने होगे । जिससे हम एक भ्रष्टाचार मुक्त भारत के सपने को सच कर सके।

निबंध 4

  • प्रस्तावना :

भ्रष्टाचार अर्थात भ्रष्ट + आचार। भ्रष्ट यानि बुरा या बिगड़ा हुवा तथा आचार का अर्थ है आचरण। अर्थात भ्रष्टाचार का शाब्दिक अर्थ है वह आचरण जो किसी भी प्रकार से अनैतिक और अनुचित हो। जब कोई व्यक्ति न्याय व्यवस्था के मान्य नियमो के विरुद्ध जाकर अपनी स्वार्थ की पूर्ति के लिए काम एवम गलत आचरण करने लगता है।

भ्रष्टाचार पर निबंध | Corruption Essay in Hindi
भ्रष्टाचार पर निबंध | Corruption Essay in Hindi

तो वह व्यक्ति को सामाजिक रूप से भ्रष्टाचारी कहा जाता है। आज भारत जैसे देश जिसको सोने की चिड़िया कहा जाता था उस देश में भ्रष्टाचार अपनी जड़े फैला कर बढ़ता जा रहा है। आज भारत में कई व्यक्ति मौजूद है जो चाहे सरकारी हो या बिन सरकारी भ्रष्टाचार ही है। आज पूरी दुनिया में भ्रष्टाचार के मामले में भारत ९४ वे पायदान पर है। भ्रष्टाचार के अनेक रंग रूप है जैसे रिश्वत लेना, रिश्वत देना, काला-बाजारी करना, जानबूझकर दाम बढ़ाना, पैसा लेकर काम करना, हफ्ता वसूली, सस्ता सामान लेकर महंगा बेचना आदि।

  • भ्रष्टाचार के कई कारण है :
भ्रष्टाचार पर निबंध | Corruption Essay in Hindi
भ्रष्टाचार पर निबंध | Corruption Essay in Hindi

भारत में मुख्य घुस यानि रिश्वत जिसमे रिश्वत लेने वाला और रिश्वत देने वाला भी भ्रष्टाचारी है, चुनाव में धांधली, ब्लैकमेल करना, टेक्स्ट चोरी, जूठी गवाही, जूठा मुकदमा, परीक्षा में नकल करना और करवाना, परीक्षार्थी का गलत मुल्यांकन, जबरजस्ती चंदा लेना, पैसे लेकर वोट देना, वोट के लिए पैसा और शराब बांटना, अपने कार्यो को करवाने के लिए न पद राशि देना और लेना यह सब भ्रष्टाचार ही है।

  • भ्रष्टाचार के कारण :

1. असंतोष – जब किसी को किसी चीज के आभाव के कारण कष्ट होता है तो वह भ्रष्टाचार करने के लिए विवश हो जाता है।

2. स्वार्थ और असमानता – असमानता, आर्थिक, सामाजिक या सम्मान, पद प्रतिष्ठा के कारण भी व्यक्ति अपने आप को भ्र्ष्ट बना लेता है। भिन्नता और ईर्षा की भावनाओ का शिकार हुवा व्यक्ति भ्रष्टाचार को अपना ने के लिए विवश हो जाता है। साथ ही रिश्वत खोरी, भाई-भतीजावाद, आदि भी भ्रष्टाचार को जन्म देते है।

३. भारत में बढ़ता भ्रष्टाचार – भ्रष्टाचार एक बीमारी की तरह है। आज हमारे भारत देश में भ्रष्टाचार दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। इसकी जड़े तेजी से फ़ैल रही है यदि समय रहते इसे नहीं रोका गया तो यह पुरे देश को खोखला कर देगा।

जीवन का कोई भी क्षेत्र इसके प्रभाव से मुक्त नहीं है। यदि हम अभी की बात करे तो ऐसे कई उदाहरण मौजूद है जो की भ्रष्टाचार के बढ़ते बुरे प्रभाव को दर्शाते है जैसे की आईपीएल में खिलाड़िओ की स्पोट्र्स-फिक्सिंग, नौकरीओ में अच्छी पोस्ट पाने की लालसा में कई लोग रिश्वत देने से भी नहीं चूकते। आज भारत का हर तब्कका इस गंभीर बीमारी से ग्रस्त है।

  • भ्रष्टाचार रोकने के उपाय :
भ्रष्टाचार पर निबंध | Corruption Essay in Hindi
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यह एक संक्रामक रोग है। समाज में विभिन्न स्त्रो पर फैले भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कठोर दंड व्यवस्था की जनि चाहिए। आज भ्रष्टाचार की स्थिति यह है की व्यक्ति रिश्वत के मामले में ोकड़ा जाता है और रिश्वत देकर ही छूट भी जाता है।

जब तक इस अपराध के लिए कड़ा दंड नहीं दिया जायेगा तब तक यह बीमारी दीमक की तरह पुरे देश को खा जाएगी। लोगो को स्वयं में ईमानदारी विकसित करनी होगी , आने वाली पीढ़ी तक सुआचरण के फायदे पहुंचाने होंगे।

  • उपसंहार :

भ्रष्टाचार हमारे नैतिक जीवन मूल्य पर सबसे बड़ा प्रहार है। भ्रष्टाचार से जुड़े लोग अपने स्वार्थ में अंधे होकर राष्ट्र का नाम बदनाम कर रहे है।

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मेरा नाम निश्चय है। में इसी तरह की हिंदी कहानिया , निबंध , कविताए , भाषण और सोशल मीडिया से संबंधित आर्टिकल लिखता हु। यह आर्टिकल भ्रष्टाचार पर निबंध | Corruption Essay in Hindi अगर आपको पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करे और हमे फेसबुक , इंस्टाग्राम आदि में फॉलो करे।

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