शिक्षक दिवस पर निबंध | Teachers Day Essay in Hindi

प्रस्तावना

आज ५ सितंबर को हम शिक्षक दिन के रूप में मनाते है। शिक्षक दिन के इतिहास के बारेमे आज हम विस्तार से बात करेंगे। शिक्षक दिन डॉ सर्वपल्ली राधा-कृष्णन की याद में मनाया जाता है। तो आज हम उनके बारे मे बात करेंगे।

शिक्षक दिवस पर छोटे तथा बड़े निबंध | Short and Long Essay on Teacher’s Day in Hindi

#निबंध : 1(100 शब्द)

पूज्य पटेल भाई मेरे प्रिय शिक्षक है। पटेल भाई की उमर मेरे खयाल से पचास साल की होगी। वह पाठशाला मे लगभग आखरी पच्चीस साल से पढाते होंगे। पटेल भाई एकदम सरल स्वभाव के है।

शिक्षक दिवस पर निबंध | Teachers Day Essay in Hindi
शिक्षक दिवस पर निबंध | Teachers Day Essay in Hindi


वह सफेद खडी के कपदे पहनते ह। वह एकदम तंदरस्त हे।पचास साल की उम्र मे भी वह एकदम स्फूर्तिले हे। पटेल भाई एन्ग्रेजी और गुजरती के शिक्षक है।


वह सुध भाषा बुलवाने का आग्रह रखते है।वह एत्ना अच्छा एन्ग्रेजी पढ़ाते हे। की हमे घर मे किसी की मदद की जरुरत नही पडती।उन्के सिखाये गए एन्ग्रेजी सब्द आसानी से याद रहे जताए है।


उसके आक्षर मोति के दाने जैसे है । वह गुजराती कविता मधुर सुर मे गाते है। वह गुजराती के निबंध और व्याकरण भी अच्छा सिखाते है। वह हमको कभी कभी कहानी भी सुनाते है ।

शिक्षक दिवस पर निबंध | Teachers Day Essay in Hindi
शिक्षक दिवस पर निबंध | Teachers Day Essay in Hindi


पटेल भाई हमेशा मुस्कुराते रहेते है। वह हर रोज पाठशाला टाईम पे पहुंच जाते है। वह हम पर कभी गुस्सा नही होते । वह शिस्त के आगृही है । वह कठोर होने पर भी प्रेमाल है । वह हम को हमारी कोई भी परेशानी दूर करने मे हमारी सहायता करते है।


पटेल भाई और भी कई सारी प्रवृति मे इच्छा प्रगट करते है। वह हमको नाटक, संबाद, वेशभूषा आदी की तालीम देते है। वह कम बोलते है । उसका आचरण हम को सदा प्रेरणा देता है । पटेल भाई हमारे सच्चे दोस्त और पथदर्शक भी है।

#निबंध : 2(150 शब्द)

हमारे भारत देश में हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिन मनाया जाता है। इस दिन भारत के द्वितीय राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म दिवस होता है जो एक महान विद्वान और आदर्श शिक्षक थे।

दुनिया के विभिन्न देशों में अलग-अलग दिन शिक्षक दिन मनाया जाता है। भारत में 5 सितंबर 1962 से शिक्षक दिन मनाया जा रहा है। शिक्षक दिवस के दिन सरकार द्वारा कुछ महान शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है।

शिक्षक दिवस पर निबंध | Teachers Day Essay in Hindi
शिक्षक दिवस पर निबंध | Teachers Day Essay in Hindi

शिक्षक दिवस के दिन विद्यालयों में विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिता और कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस दिन विद्यार्थी अपने शिक्षक को गिफ्ट ग्रीटिंग कार्ड भेज कर वीडियो और ऑडियो ,संदेश, मेल ,ईमेल आदि भेजकर शिक्षक दिवस की बधाई देते हैं।

शिक्षक हमें सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं देते बल्कि हमें अच्छा इंसान बनाने में मदद करते हैं। शिक्षकों की मेहनत और लगन के कारण व्यक्ति का मानसिक विकास होता है और और वह आगे जाकर जिंदगी में कुछ कर सकते हैं। हमें अपने शिक्षकों का सदैव आदर करना चाहिए क्योंकि उनके बिना दुनिया में हम सभी अधूरे हैं।

#निबंध : 3(400 शब्द)

” गुरू ब्रह्मा गुरू विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा गुरु 
 साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नम: “

गुरु-शिष्य परम्पपरा हमारे भारत देश की संस्कृति का एक अहम् और पवित्र हिस्सा हैं जीवन में माता- पिता का स्थान कभू कोई नै ले सकता , क्योंकि वे ही हमें इस खूबसूरत दुनिया में लाते हैं। कहा जाता हैं की जीवन में सबसे पहले गुरु हमारे माता – पिता होते हैं। भारत में प्राचीन समय से ही गृ व शिक्षक परंपरा छवि आ रही हैं। जीवन जीने का असली तरीका हमें शिक्षक ही सीखते हैं और सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं।

शिक्षक दिवस पर निबंध | Teachers Day Essay in Hindi
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शिक्षकदिन कब और क्यों मनाया जाता है?

प्रतिवर्ष शिक्षकदिन सितंबर १९६२ को मनाया जाता है। भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन सर्वपल्ली के जन्मदिन के अवसर पर शिक्षको प्रति सन्मान प्रकट करने के के लिए पुरे भारत में मनाया जाता है। गुरु का स्थान सभी के जीवन में महत्वपूर्ण होता है। समाज में गुरु के लिए एक विशिस्ट स्थान है। डॉ. राधाकृष्णन सर्वपल्ली एक महान दार्शनिक शिक्षक थे। अध्यापन से उनका गहरा रिश्ता था। एक आदर्श शिक्षक के सभी गन उनमे थे। सरकार द्वारा शिक्षक दिन के मौके पर तौफा भी दिया जाता है।

शिक्षक का अर्थ :
शिक्षक को “शि” मतलब सिखर तक लाने जाने वाला , “क्ष” मतलब क्षमा का भाव रखने वाला और “क” का मतलब कमजोरियों को दूर करने वाला। अर्थात जो विद्यार्थी को हर गलती पर क्षमा करने का भाव रखते है। उसकी हर कमजोरी को दूर कर उसे सफलता तक ले जाता है।

गुरु-शिष्य का संबध :

गुरु-शिष्य परंपरा भारत की संस्कृति का अहम् और पवित्र हिस्सा है। इसके कई सारे उदाहरण इतिहास में दर्ज है। शिक्षक अपने विद्यार्थी के पढ़ने के साथ साथ चरित्र का निर्माण भी करते है। सही को जीवन जीने की सही राह शिक्षक ही दिखते है।शिक्षक का सबसे बड़ा योगदान बच्चो के चरित्र निर्माण पर होता है। यह भी कहा जाता है की प्रलय और निर्माण एक शिक्षक की गौद में पलते है। एक गुरु ही शिष्य के चरित्र का निर्माण करता है।

शिक्षक दिवस पर निबंध | Teachers Day Essay in Hindi
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कोरोना काल मे शिक्षक दिवस:

प्रत्येक वर्ष सभी स्कूल में शिक्षकदिन के मौके पर छात्रों को छुट्टी होती है। परन्तु स्कूल में उत्सव , सांस्कृतिक कार्यकम होता है। बच्चे
और शिक्षक दोनों ही प्रत्योगिता में हिस्सा लेते है। परन्तु इस वर्ष कोरोना महामारी के कारण शिक्षकदिन इंटरनेट के मध्याम एवं ऑनलाइन मनाया गया। ये भी शिक्षकदिन मानाने का अनूठा तरीका बना।

इस कार्यक्रम में सभी स्कूल के बच्चो को इंटरनेट के माध्यम से शिक्षक पर भाषण , शिक्षकदिन पर निबंध देने थे। साथ ही इस बार सभी बच्चो ने अपने शिक्षक को शिक्षकदिन की बधाई डिजिटल के माध्यम से भेजी।

उपसंहार :

यह सर्वविदित है। हमारे जीवन को सवारने में एक गुरु का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। इस कोरोना महामारी में भी सभी शिक्षको ने अपना परिश्रम लगा कर बच्चो को पढ़ाया है।एक ही समय पर इतने बच्चो को इंटरनेट के माध्यम से पढ़ना काफी मुश्किल कार्य है। इस शिक्षकदिन के अवसर पर हम सभी अपने अपने गुरु का दिल से धन्यवाद करते है।

#निबंध : 4(250 शब्द)

शिक्षक है एक दीपक की छवी ,
जो जलकर दे दुसरो को रवि ,
ना रखता वो कोई ख्वाईस बड़ी ,
उसके लिए शिष्य की सफलता ही है ,
खुशियों की लड़ी।

बिंदु: – कब ? कहाँ पे? किसने भाग लिया? – प्रधानाचार्य की भूमिका किसने उठाई? – उन्होंने कैसे पढ़ाया? – सबसे अच्छा किसने सिखाया? – क्या बाद में कोई समारोह था? – उस दिन आपको सबसे ज्यादा क्या पसंद आया?

शिक्षक दिवस पर निबंध | Teachers Day Essay in Hindi
शिक्षक दिवस पर निबंध | Teachers Day Essay in Hindi

हमारे स्कूल में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया गया ,वह भारत के दूसरे राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन है। उस दिन मानक 9 और 10 के सभी छात्र अपनी पसंद के शिक्षक बनने के लिए स्वतंत्र थे। हमारे प्रिंसिपल और शिक्षकों ने उन छात्रों का चयन किया जो उस दिन शो चलाएंगे। जेसे की एक
10 वीं कक्षा के होशियार छात्र को प्रिंसिपल चुना गया। अन्य छात्रों को उनकी पसंद और प्रदर्शन के अनुसार विषय दिए गए। हालांकि शुरुआत में कुछ समस्याएं थीं, छात्रों को शिक्षक होने का आनंद मिला।

मानाक 10 की अमृता शर्मा, जिन्होंने अंग्रेजी शिक्षक की भूमिका निभाई, उन्होंने सबसे अच्छा सिखाया। उन्हें छात्रों और शिक्षकों से वोट मिले । उन्हें एक छोटे से सर्वश्रेष्ठ शिक्षक के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

शिक्षक दिवस पर निबंध | Teachers Day Essay in Hindi
शिक्षक दिवस पर निबंध | Teachers Day Essay in Hindi

मुझे स्कूल में माहौल पसंद आया और हम सभी को आनंद आया। हम में से अधिकांश को एहसास हुआ कि कक्षा में पढ़ाना कितना कठिन था।

जीवन का मार्ग कठिन है ,
सत्य का विचार कठिन है,
और जो हर हल में सत्य सिखाये ,
वही एक सफल शिक्षक कहलाता है।

हमारे शिक्षकों को सलाम!

#निबंध : 5(600 शब्द)

डॉ.सर्वपल्ली राधा-कृष्नन जो भारत के सबसे पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति रहे। वे भारतीय संस्कृति के संवाहक ,प्रख्यात शिक्षा वैद्य ,महान दार्शनिक और एक आस्थावान हिन्दू विचारक थे। उनके इन्ही गुणों के कारण सन १९५४ में भारत सरकार ने उनका सन्मान भारत रत्न से किया था। उनका जन्म ५ सितंबर १८८८ से हुवा था और उसी दिन वो भारत में शिक्षक दिन के रूप  में मनाया जाता है। जिस परिवार में उन्होंने जन्म लिया वो ब्राह्मण परिवार था। उनका जन्म स्थान भी एक पवित्र तीर्थ स्थान के रूप में प्रचलित है।

डॉ.सर्वपल्ली राधा-कृष्नन एक गरीब किन्तु विद्वान ब्राह्मण की संतान थे। उनके पिता का नाम सर्वपल्ली वीरा स्वामी और माता का नाम सीता अम्मा था। उनके पिताऔर  राजस्व विभाग में काम करते थे। उन पर बहुत बड़े परिवार के भरण-पोषण का दायित्व था। वीरा स्वामी के ५ पुत्र और एक पुत्री थे राधा-कृष्नन उन सभी में दूसरे स्थान पर थे उनके पिता काफी कठनाईओ के साथ अपने परिवार का निर्वाहन करते थे।  इसी कारण राधा-कृष्नन को बचपन में कोई विशेष सुख प्राप्त नहीं हुवा।

शिक्षक दिवस पर निबंध | Teachers Day Essay in Hindi
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डॉ.राधा-कृष्नन का बचपन तिरुपति जैसे धार्मिक स्थलों पर व्यतीत हुवा उन्होंने प्रथम ८ साल तिरुपति में ही गुजारे। हलाकि उनके पिता पुराने और धार्मिक विचारो वाले थे। इसके बावजूद उन्होंने राधा-कृष्नन को ईसाई स्कूल में १८९६ से १९०० तक पढ़ने भेजा। फिर अगले ४ साल यानि १९०० से १९०४ तक की शिक्षा वेलूर में हुई।  इसके बाद उन्होंने मद्रास ख्रिश्चन कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की। वे बचपन से ही होनहार छात्र थे इन १२ वर्षों के अध्यन कल में राधा-कृष्नन ने बाईबल  के महत्व पूर्ण अंश भी याद कर लिये।

इसके लिए उन्हें विशिष्ट योग्यता का सन्मान भी दिया गया। इस उम्र में उन्होंने वीर सावरकर और स्वामी विवेकानंद का भी अध्ययन किया। उन्होंने १९०२ में मेट्रिक स्तर की परीक्षा उत्तीर्ण की और उन्हें छात्र वृति भी प्राप्त हुई। इसके बाद उन्होंने १९०४ में कला  संकाय परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की उन्हें मनोविज्ञान , इतिहास और गणित विषय में विशेष गोग्यता की टिपण्णी भी मिली।

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दर्शन शास्त्र में M.A के बाद १९१६ में वैद्य मद्रास रेसीडेन्सी कॉलेज में सहायक प्राध्यापक नियुक्त हुये। डॉ राधा-कृष्नन ने अपने लेखो और भाषणों से विश्व को दर्शन शास्त्र से अवगत कराया सरे विश्व में उनके लेखो की प्रशंसा की गयी थी उस समय मद्रास के ब्राह्मण परिवारों में कम उम्र में ही शादी सम्पन हो जाती थी। और राधा-कृष्नन भी उसके अपवाद नहीं रहे। १९०३ में १६ वर्ष की आयु में ही उनका विवाह एक दूर की रिश्तेदार शिवाकामो से हुवा। उस समय उनकी पत्नी की आयु मात्र १० वर्ष की थी।

इसी कारण ३ साल बाद ही उनकी पत्नी ने उनके साथ रहना शुरू किया। हलाकि उनकी पत्नी शिवाकामो ने परंपरागत रूप से शिक्षा प्राप्त नहीं की थी लेकिन उनका तेलुगु भाषा पर अच्छाधिकार था वे अंग्रेजी भाषा भी पढ़-लिख सक्ती थी। १९०८ में राधा-कृष्नन दम्पति को संतान के रूप में पुत्री की प्राप्ति हुई।

शिक्षक दिवस पर निबंध | Teachers Day Essay in Hindi
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डॉ राधा-कृष्नन ने १९०८ में ही कला स्नातक की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की।  दर्शन शास्त्र में विशिष्ट योग्यता प्राप्त की। उस अध्ययन के दोहरान वे अपनी निजी आमदनी के लिए बच्चों  को ट्यूशन पढ़ाने लगे। १९०८ में उन्होंने MA की उपाधि प्राप्त कने के लिए एक शोर बभी लिखा। इस समय उनकी आयु मात्र २० साल  की थी। जल्दीही उन्होंने वेदो और उपनिषदों का अध्ययन कर लिया। इसके उपरांत उन्होंने हिंदी और संस्कृत भाषा का भी रूचि पूर्वक अध्ययन किया। 

शिक्षा का प्रभाव जहाँ प्रत्येक व्यक्ति पर निश्चित रूप से पड़ता है वही शैक्षित संस्था की गुणवत्ता भी अपना प्रभाव छोड़ती है। कुछ लोग हिंदुत्व वादी विचारो को निचा गिनते थे और उनकी आलोजना भी करते थे , उनकी आलोजनाओ को डॉ राधा-कृष्नन ने चुनौती की तरह लिया। वो हिन्दू शाश्त्रो का गहरा अध्ययन करना शुरू किया दरसल डॉ राधा-कृष्नन यह जान ना चाहते थे की इस संस्कृति के विचारो में चेतनता है और किस संस्कृति के विचारो में जड़ता है। इस कारण राधा-कृष्नन ने तुलनात्मक रूप से यह जान लिया था की भारतीय आध्यात्मक काफी समृद्ध हे।

इससे उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला की  भारतीय संस्कृति ,धर्म , ज्ञान और सत्य पर आधारित थे जो की प्राणी को जीवन का सच्चा संदेश देती है। डॉ राधा-कृष्नन समुचय विश्व को एक विद्यालय मानते थे उनका मानना था की शिक्षा के जरिये ही मानव मष्तिष्क  का सदुपयोग किया जा सकता है।

डॉ राधा-कृष्नन अपनी बुद्धि से परिपूर्ण व्याख्याओं , आनन्त्दायी अभिव्यक्तिओ और हलकी गुदगुदाने वाली कहानिओं  से छात्रों को मंत्र मुग्ध कर देते थे।  कुछ नैतिक मूल्यों को अपने आचरण में उतारनेका ज्ञान वे अपने छात्रों को भी देते थे। वे जिस भी विषय को पढाते थे पहले स्वयं उसका वहन अध्ययन करते थे। दर्शन जैसे गंभीर विषय की भी वे अपनी शैली  से सरल बना देते थे।

शिक्षक दिवस पर निबंध | Teachers Day Essay in Hindi
शिक्षक दिवस पर निबंध | Teachers Day Essay in Hindi

१९०९ में २१ वर्ष की आयु में डॉ राधा-कृष्नन ने मद्रास प्रेजिडेंसी कॉलेज में दर्शन शाश्त्र पढ़ाना शुरू किया। इस समय उनका वेतन मात्र ₹३७ था | १९१२ में डॉ राधा-कृष्णन की मनोविज्ञान के आवश्यक शीर्षक की एक पुस्तिका भी प्रकाशित हुई।जो कक्षा मे दिए गए व्याख्यानों का संग्रह था | इस पुस्तिका के द्वारा उनकी ये योग्यता प्रमाणित हुई के प्रत्येक पद की व्याख्या करने के लिए उनके पास शब्दों का अतुल्य भंडार तो है ही साथ मे उनकी स्मरण शक्ति भी अत्यंत विलक्षण है।

जब डॉ राधा-कृष्णन यूरोप और अमेरिका दौरे से वापस भारत लौटे तो यहां के विभिन्न विश्व विद्यालयों ने उन्हें उपाधियां प्रदान कर उनका सम्मान किया | १९८८ की सर्दियों में इनकी प्रथम मुलाकात पंडित जवाहरलाल नेहरू से उस समय हुई जब वे कौंग्रेस पार्टी के वार्षिक अधिवेशन में सामिल होने के लिए कोलकाता आए हुए थे | हाला की सर्वपल्ली राधा-कृष्णन भारत के शैक्षिक सेवाओं के सदस्य होने के नाते किसी भी राजनैतिक संस्करण में हिस्सेदारी नहीं ले सकते थे | लेकिन फिर भी उन्हों ने इस नियम की कोई भी परवाह नहीं की और भाषण दिया।

शिक्षक दिवस पर निबंध | Teachers Day Essay in Hindi
शिक्षक दिवस पर निबंध | Teachers Day Essay in Hindi

१९२९ मैं  उन्हें लेक्चर देने के लिये मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी द्वारा आमंत्रित किया गया। इन्होंने मैनचेस्टर व लंदन मे कई लेक्चरर दिये | इनकी शिक्षा संबंधी उपलब्धियों के दायरे मे कई सांस्थानिक कार्यों को देखा जा सकता है, जेसे ये सन् १९३१ से १९३६ तक आंध्र विश्व विद्यालय के वाइस चांसलर रहे| ऑक्सफोर्ड विश्व विद्यालय में १९३६ से १९५२ तक प्राध्यापक रहे। १९४६ में यूनेस्को में भारतीय प्रतिनिधि के रूप मे अपनी उपस्थिति दर्ज करायी।

१९५२ में सोवियत संघ के आने के बाद डॉ राधा-कृष्णन भारत के उपराष्ट्रपति निर्वाचित किए गए | संविधान के अनुसार उपराष्ट्रपति का नया पद सुरजीत किया गया था | पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इस पद के लिए राधा-कृष्णन का चयन करके लोगों को चौंका दिया था |सभी को आश्चर्य था कि इस पद के लिए कॉंग्रेस पार्टी के किसी राजनेता का चुनाव क्यों नहीं किया गया। उपराष्ट्रपति के रूप में राधा-कृष्णन ने राज्य सभा में अध्यक्ष का पदभार भी सम्भाला।

शिक्षक दिवस पर निबंध | Teachers Day Essay in Hindi
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हमारे देश के दूसरे राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधा-कृष्णन के जन्मदिन ५ सितंबर को प्रति वर्ष शिक्षक दिवस के रूप मे मनाया जाता है | इस दिन पूरे देश मे भारत सरकार द्वारा श्रेष्ठ शिक्षकों को पुरस्कार भी प्रदान किया जाता है | हालाकि उन्हें १९३१ मैं ब्रिटिश सरकार द्वारा “सर” की उपाधि दी गई, लेकिन स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात वो उपाधि डॉ राधा-कृष्णन के लिए समाप्त हो गई थी।

जब वे उपराष्ट्रपति बने तो स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने १९५४ मे उनकी महान दार्शनिक और शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए उन्हें देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न प्रदान किया।

कड़ी धूप में जो दे वृक्ष की छाया,
एसी है इनके ज्ञान की माया,
नहीं होता कोई “रक्त सबंध”,
फिर भी है जीवन का अनमोल बंधन।

शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

संबधित जानकारी :

बाल मजूरी पर निबंध

मेरा नाम निश्चय है। में इसी तरह की हिंदी कहानिया , निबंध , कविताए , भाषण और सोशल मीडिया से संबंधित आर्टिकल लिखता हु। यह आर्टिकल “शिक्षक दिवस पर निबंध | Teachers Day Essay in Hindi” अगर आपको पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करे और हमे फेसबुक , इंस्टाग्राम आदि में फॉलो करे।

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