बेरोजगारी पर निबंध | Essay on Unemployment in Hindi

बेरोजगारी पर निबंध | Essay on Unemployment in Hindi : भारत की वर्तमान समस्याओं मेसे एक गंभीर समस्या बेरोजगारी है। बेरोजगारी की वजह से गरीबी बढ़ती है। यह समस्या लंबे समय की और अर्थतंत्र में बहुत घनी तरह से फैली हुई है। विश्व के कई देशो इस बेरोजगारी की समस्या से ऊपर उठने की कोशिस कर रहे है। बेरोजगारी का मुख्य कारण शिक्षा का अभाव , गरीबी , अंधविश्वास , रोजगार के तको की कमी आदि है। खतम करने के लिए भारत सकरकर को और विश्व के सभी देशो को आवश्यक कदम उठाने चाहिए। विकासशील देशो के विकास में बाधाए बनकर कड़ी रहने वाली काफी समस्याओं मेसे एक समस्या बेरोजगारी भी है।

बेरोजगारी का अर्थ :
Essay on Unemployment in Hindi
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“जो पुख्तवय की व्यक्ति ,जिसकी उम्र १५ से ६० तक की हो ,जो बाजार में प्रवर्तते वेतनदर पर काम करने की इच्छा रखता हो और ईमानदारी और नीति से काम करना चाहता हो , काम करने योग्य भी हो और काम करने की गोग्यता भी उसमे हो ,काम करने की खोज में हो फिर भी उन्हें काम न मिले तो वो बेरोजगार कहलाता है। ऐसी सामूहिक परिस्थिति को बेरोजगारी कहते है। ” और हा , जो कोई व्यक्ति जिनका १५ से ६० में की आयु में समावेश नहीं होता , वो अपंग , अशक्त ,रोर्गो से पीड़ित ,वृद्ध ,आलसी या गृहिणी हो , जैसे की यह लोगो में काम करने की शक्ति हो फिर भी वह काम नहीं करना चाहते तो वो बेरोजगार नहीं गिने जाते।

बेरोजगारी के मुख्य स्वरुप :

भारत के अर्थतंत्र में बेरोजगारी के कई स्वरुप पाए जाते है की जो निचे दिए गए है।

१. ऋतुगत बेरोजगारी :
भारत में कृषि क्षेत्र में सिंचाई की आपूर्ति सगवड़े ,बारिष की अनियमितता हुए और वैकल्पिक रोजगारी की तको का अभाव की वजह से ३ या ५ मास तक बेरोजगार रहना पड़ता है जिसको ऋतुगत या मौसमी बेरोजगारी कहते है।

२. घर्षण जन्य बेरोजगारी :
पुराणी टेक्नोलॉजी के स्थान पर नई टेक्नोलोजिया आने पर अमुक समय तक श्रमिक को बेरोजगार रहना पड़ता है या फिर कुछ समय तक उसकी शिक्षा लेनी पड़ती है जिसकी वजह से वो कुछ समय के लिए बेरोजगार रहता है।

Essay on Unemployment in Hindi
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३. आयोजित बेरोजगारी :
भारतीय अर्थतंत्र पछात और रुढिचुस्त है ,सामाजिक रूप से पछात , परंपरागत नियमो , निरक्षरता और आयोजित सुविधाओं के आभाव की वजह से आयोजित बेरोजगारी दिखाई देती है।

४.प्रच्छन्न या छुपी बेरोजगारी :
किसी व्यवसाय में जरूरत से ज्यादा व्यक्ति का होना मतलब की इन अधिक श्रमिकों को काम से हटा दिया जाये तो भी उत्पादन में कोई फर्क नहीं पड़ता मतलब ये लोगो की कोई आवस्य्क्ता ही नहीं है। ऐसे लोगो को प्रच्छन्न या छुपे बेरोजगार कहते है।

५. औद्योगिक बेरोजगारी :
ओधोगिक क्षेत्र में हो रहे बदलाव की वजह से जो कोई व्यक्ति को लंबे या थोड़े समय के लिए बेरोजगार रहना पड़े तो ऐसी स्तिथि को ओधोगिक बेरोजगारी कहते है।

६. शिक्षित बेरोजगारी :
कम से कम माध्यमिक शीक्षण प्राप्त किया हो और फिर भी उसे कोई काम न मिले तो वो शिक्षित बेरोजगार कहेलता है। हमारे देश में ज्यादातर शिक्षित बेरोजगार की काफी संख्या है।

Essay on Unemployment in Hindi
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इच्छ्नीय वेतन न मिलने पर लोग काम नहीं करते और इसकी वजह सेपढ़े-लिखे होने के बावजूद भी बेरोजगार रहते है।

भारत में बेरोजगारी का प्रमाण :

भारत में बेरोजगारी का प्रमाण अलग-अलग राज्य में अलग-अलग है। रोजगार विनिमय कचहरी में रोजगार के लिए इच्छुक व्यक्तिओं की यादि में उदासीनता के कारण सच्चा अंदाजा लगाना मुश्किल है। फिर भी भारत सरकार श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के द्वारा और नेशनल सेम्पल सर्वे (NSS) के आधार पर भरता में बेर्रोजगारी की व्यापकता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

२०११ की जनगणना के मुताबिक ११६ मिलियन लोग बेरोजगारी की तलाश में थे। ३२ मिलियन लोग अशिक्षित बेरोजगार और ८४ मिलियन लोग शिक्षित बेरोजगार थे। जिन लोगो की उम्र १५ से २४ साल की थी उनमे से ४.७० करोड़ लोग बेकार बैठे थे।

लेबर ब्यूरो के सर्वे अनुसार भारत में २०१३ -२०१४ में बेरोजगारी का दर ५.४० पाया गया था। और इसी साल में गुजरात में बेरोजगारी का दर १.२% था। भारत में २००९-१० में शहरी इलाको में बेरोजगारी का दर ३.४% और ग्राम्य इलाके में १.६% पाया गया था और शिक्षित बेरोजगारी का दर शहरी इलाके में ज्यादा पाया गया था। २०१३ में महिलाओ में बेरोजगारी का दर ७.७% पाया गया था।

भारत में सिक्किम ,केरला, पश्चिम बंगाल ,उतर प्रदेश , छत्तीसगढ़ , जम्मू-कश्मीर , त्रिपुरा , जैसे राज्यों में बेरोजगारी का प्रमाण ज्यादा मात्रा में पाया गया था। जब की हिमाचल प्रदेश ,हरियाणा ,कर्नाकट ,चंडीगढ़ और गुजरात जैसे राज्यों में बेरोजगारी का प्रमाण क्रमशः कम पाया गया था। और गुजरात में रोजगारी के क्षेत्र में अच्छी परिस्थितियॉ थी।

Essay on Unemployment in Hindi
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भारत मे एक अंदाज अनुसार उच्च शिक्षा के १५% युवान थे और विश्व की जनसंख्या के ६६% लोग जो ३५ साल की आयु तक के युवान है वे भारत में है। भारत को अगर विश्व में युवाओं के देश के आधार पर महासत्ता बनने की दिशा मे आगे बढ़ना हो तो भारत मे बेरोजगारी की स्थिति को बदलना पड़ेगा।

भारत मे बेरोजगारी की स्थिति ज्यादा विकट बनने का मुख्य कारण जनसंख्या में बढ़ोतरी, सिर्फ और सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान, प्रायोगिक ज्ञान का अभाव, टेक्नीकल ज्ञान के कौशल का अभाव, पूर्ण कक्षा की रेजगारी खड़ी करने मे निष्फलता, खेतीबाड़ी के क्षेत्र मे बारिश की अनियमितता और जोखिम का ज्यादा प्रमाण, खेती में रुचि की कमी, सिंचाई में अपूर्ति , खेती के अलावा रोजगार विकल्पों के अभाव के कारण बेकार बैठना, कुटीर उद्योग गृह उद्योग और लघु उद्योगों की विकट स्तिथि, नाती-जाती, संयुक्त कुटुंब, परंपरागत व्यापार मे लगे रहना, अन्य नए व्यापार और उद्योग शरू करने में साहस की कमी, ज्ञान, कौशल और तालीम की कमी, मानव श्रम का सही इस्तेमाल नहीं कर पाना, उद्योगीक विकास का धीमा दर, बचत करने का कम विचार जिसकी वज़ह से पैसे जमा करने में कमी आना, जिसके कारण नए व्यापार में पैसों की कमी जेसे अनेक कारण है |

बेरोजगारी कम करने के उपाय :

बेरोजगारी की समस्या हमारे आयोजन की एक सबसे कमजोर कड़ी है। गरीबी और बेरोजगारी सभी सगी बहेनो जैसी है। दोनों सम्बन्ध है। गरीबी का मुख्य कारण बेरोजगारी है। ये समस्या की असर युवा शिक्षित वर्ग में अधिकतम है। जैसे की उनमे शिक्षा के प्रति रस-रूचि का कम होना। सामाजिक और मानसिक परिस्थिति पर ग़हरी असर होना।

मनोविज्ञानिक नजरिये से रोजगारी न मिलने के कारण हताश होना। अगर लंबे समय तक वे बेकार रहे तो वे सामाजिक और अनैतिक प्रवृति में जुड़ जाते है जैसे की नशीले पदार्थ की हेराफेरी ,गैर कानूनी व्यापार ,चोरी-डकैती , वसूली जैसे गैर कानूनी काम करने के लिए प्रेरित होना, सामाजिक एवं आर्थिक असमानता में बढ़ौती , वर्ग-भेद का सर्जन होना , बेकारी के साथ गरीब लोग और बेकार परिवारों की स्थिति ज्यादा विकट होना , उनका नशीले पदार्थ और अन्य व्यसन की और जाना , ऐसे बेरोजगारी की असर व्यक्ति-परिवार एवं अर्थ तंत्र के ऊपर और सामाजिक नजरिए से भी विकट हुई है।

सरकार द्वारा लिए गए कुछ असर कारक उपाय निम्न लिखित है।

(१) भारत में तेजी आर्थिक वृद्धि दर प्रतिवर्ष १०% जितना ऊपर ले जाने का लक्ष्य रख कर सिद्ध करने के लिए गोग्य प्रयत्न करना। जाहेर एवं खानगी क्षेत्र में धनराशि का प्रमाण बढ़ाना और रोजगारी की तको में इजाफ़ा करना। अर्थतंत्र में खेती सामेध छोटे एवं गृह उद्योग ,कुटीर उद्योग सामेध सभी विभाग में और प्रदेश में तेजी से एवं संतुलित विकास करने के लिए रोजगारी के नये क्षेत्रो को खोलना चाहिए। सरकार ने रोजगारी बढ़ाने के लिए अनेक विविध योजना द्वारा आर्थिक सहाय , शिक्षण ,तालीम केन्द्र शरू किये है।

Essay on Unemployment in Hindi
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(२) श्रम प्रधान उत्पादन पद्धति पर आधारित इस्तेमाल किये जाने वाली वस्तुओ का उत्पादन करने वाले एकमो ,छोटे एवं लघु उद्योगों और हस्तकला कारीगरी से लगते उद्योगों में विकास करना चाहिए। उसके लिए योजनाओं में प्रोत्साहक नीतिओं को अमल में लाना चाहिए।

(३) ग्राम्य विस्तार में खेती के अलावा के समय की बेरोजगारी कम करने के लिए खेत में एक से ज्यादा बार पाक ले सके ऐसी पद्धति का विकास करना ,नई जमीने खेती के लिए देना , हर एक खेत में पानी एवं बिजली की सुविधाएँ उपलब्द्ध कराना ,छोटी-बड़ी सिंचाई योजना ,डेम ,चेक-डेम , जलाशयों ,नहेरो ,सड़को का निर्माण करवाना , खेती संबधित प्रवृति करना , मत्स्य उद्योग , पशु-पालन। डेरी उद्योग ,वनीकरन के कार्यक्रमों द्वारा ग्राम्य विस्तार में कम धनराशि से ज्यादा लोगो को रोजगारी दी जा सकती है , इस प्रकार रोजगार लक्षी कार्य होना चाहिए।

(४) ग्राम्य विस्तार में रोजगारी की तके खड़ी करनी चाहिए जिसे उन लोगो को वहा आवश्यक धनराशि एवं रोजगारी प्रमाणसर मिलती रहे तो शहेरी विस्तार तरफ का स्थानांतर कम किया जा सकता है और रोजगारी की मांग पर का दबाव कम किया जा सकता है। खेती क्षेत्रे बागायती खेती ,सेन्द्रिय खातर आधारित खेती ,सुकि खेती एवं बहुलक्षी पाक पद्धति ,शाकभाजी-फलों की खेती की ओर ज्यादा प्रोत्शाहन देना चाहिए। ग्राम्य विस्तार में शिक्षण की गुणवत्ता एवं प्रमाण बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।

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(५) ग्राम्य विस्तार में मानव विकास को आगे बढ़ाने के लिए वहा पर आरोग्य ,शिक्षण ,शुद्ध पिने का पानी ,पौष्टिक आहार ,बिजली ,रास्ते ,बँकिंग , इंटरनेट ,संदेशा व्यवहार ,मनोरंजन बढ़ाने के साथ ,सार्वजनिक वसाहतो का निर्माण करना , स्थानिक उद्योगों को विकास एवं प्रोत्शाहन देना ,रोजगारी अर्थक कार्यक्रम करना , ग्रामीण लोगो के जीवन में पुर्णात्मक एवं परिणामात्मक सुधर लाने का मुख्य हेतु रहा है।

(६) शिक्षित बेरोजगारी एवं युवा बेरोजगारी में कमी लाने के लिए उनमे कौशल्य का विकास करना और शिक्षण के अनुरूप रोजगारी पूरी करना। कुशल कारीगर पेदा हो ऐसी व्यवस्था लक्षी और तकनिकी शिक्षण की निति अनुसरना। शाला-कॉलेज के अभ्यास क्रमो वहा के स्थानिक उद्योगों की जरुरियातो को संतोष सके ऐसा रखना।

युवा रोजगारो को शिक्षण एवं तालीम देकर उनमे विशेष कौशल्यो में बढ़ौती करके ,उत्पादकता के साथ गुणवत्ता बढ़े ,रोजगारी बढ़े ,ज्यादा आवक मिले और जीवन स्तर उचा आये ऐसे प्रयत्न जाने चाहिए। उनको सतत काम मिलेगा ऐसा आश्वासन देना चाहिए। काम की नई परिस्थिति अनुसार नई जानकारी देके हमको योग्य बनाके स्वरोजगार मिल सके और वैश्विक देशो की शर्म शक्ति की तुलना में वैश्विक स्तर पर भारतीय युवा समकक्ष खड़े रह सके ऐसी स्थिति सर्जन करने का प्रयत्न करना चाहिए।

(७) भारत सरकार का श्रम मंत्रालय और राज्य सरकारों के युवा रोजगारो को औद्योगिक विकास के साथ उनके ज्ञान को ,सूझ-बुज ,उत्शाह और कार्य क्षमता बढ़ाने के लिए तालीम एवं प्रक्षिक्षण दवरा कौश्ल्यो विकास के कार्यक्रमों “मेक इन इंडिया ” , “स्किल इंडिया ” और “डिजिटल इंडिया ” जैसी महत्वकांक्षी योजनाऐ अमल में लाई है।

Essay on Unemployment in Hindi
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टेक्नीकल संस्थाएँ , कॉलेज और यूनिवर्सिटी की स्थापनाएँ – देशभर में करके उनको व्यवसाहित अभ्यास क्रम एवं अध्यतन टेक्नोलॉजी के अनुरूप शिक्षण की सुविधाएँ उपलब्द्ध कराके ,शाला-कॉलेजों में अध्यतन अभ्यास क्रम व्यवसाहिक एवं टेक्नीकल शिक्षण द्वारा रोजगारी की मांग अनुसार रक्षम बनाने के प्रयत्न किये है। वर्तमान स्थिति में हर एक राज्य में एक IIT एवं IIM जैसी उच्च संस्थाओकी स्थापना की जा रही है।

(८) उद्योग संबंधित विकास करने के लिए, नयी रोजगार की तक का सर्जन हो उसके लिए नए उद्योग की शुरुआत हो वो जरूरी है | और इसके लिए नयी व्यापार-उद्योग की शुरुआत होना आवश्यक है।युवाओ में उद्योग के प्रति साहसिकता, कुशलता, संगठन शक्ति के साथ-साथ धनराशि भी जरूरी है। सरकार द्वारा कम धनराशि, शुरुआती कम कीमत के यंत्र, ऑफिस फर्निचर खरीदने के लिए कम ब्याज के दर पर धीराण की सवलते और बेचने के लिए सहायता जेसी अनेक योजनाओं द्वारा स्वरोजगार की तक को प्रोत्साहन देने के लिए अधिक प्रयास हुए है। काम-काज शरू करने लिए और उसे आगे बढ़ाने के लिए टेक्निकल और व्यावसायिक ज्ञान, कुशलता, कौशल्य और सहायता देने का कार्य सरकारी प्रयास की वज़ह से सम्भव हुआ है।

बैंक, संस्थाओ की आर्थिक सहाय, कम ब्याज की लोन की सुविधाएं, स्थानी व्यापारी संगठन, सेवाभावी संस्थाओं के प्रयासों की वजह से महिलाओं को गृह उद्योग स्थापित करके स्वरोजगार पाते है। इस तरह परंपरागत व्यवसाय में से बाहर निकल कर परिवार के सभ्य की एक नयी पीढ़ी तैयार हुई। जिसने नए नए व्यापार एवं उद्योगीक क्षेत्र मे विकास किया है।

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(९) रोजगार विनिमय केंद्र, रोजगार के लिए इच्छुक लोगों, श्रमिकों, कामदारों और शिक्षित कुशल अर्ध कुशल युवाओ को काम देने वाले मालिकों के साथ जोड़ने कार्य कर्ता है। यह संस्थान शिक्षित बेरोजगारों की यादि, काम की जगह, काम का प्रकार इन सबके बारे मे विश्वसनीय माहिती प्रदान करता है। कारकिर्दी पसंद करने के लिए मार्गदर्शन देता है. यह केंद्र रोजगार, कारकिर्दी जेसी सामायिक द्वारा रोजगार की माहीती देते है।’

मोडल केरीयर सेन्टर’ द्वारा एवं हेल्पलाइन नंबर 1800-425-1514 द्वारा लोगों को जरूरी माहीती, स्किल प्रोग्राम, रोजगार मेला का आयोजन जेसी मुफ्त सेवा देते हें | दिसंबर २०१५ तक देश मे ९४७ रोजगार विनिमय केंद्र थे जिसमें दिसंबर २०१३ मे १४६८ , २३ लाख बेरोजगार देश मे और गुजरात में ८.३० लाख बेरोजगार लोगो की सूची हुई थी।

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मेरा नाम निश्चय है। में इसी तरह की हिंदी कहानिया , निबंध , कविताए , भाषण और सोशल मीडिया से संबंधित आर्टिकल लिखता हु। यह आर्टिकल “बेरोजगारी पर निबंध | Essay on Unemployment in Hindi” अगर आपको पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करे और हमे फेसबुक , इंस्टाग्राम आदि में फॉलो करे।

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