बाल मजदूरी पर निबंध | Child Labour Essay in Hindi

#निबंध 1

बाल मजदूरी पर निबंध | Child Labour Essay in Hindi : किसी भी व्यवसाय और क्षेत्र में नन्हे बच्चो द्वारा करवाए गई काम एवं सेवा को बाल मजूरी कहा जाता हैं। इसका कारण गैर-जिम्मेदार पेरेंट्स(माता-पिता) या फिर आपने फायदे हेतु जबरदस्ती काम करवाते मालिक हैं।

आजकल कई जगहों पर बच्चों द्वारा अपने बचपन में की गई सेवा को बाल मजदूरी कहते है। ये गैर-जिम्मेदार माता-पिता की वजह से या फिर मज़बूरी का फायदा उठाने के लिए मालिकों जबरजस्ती करते है और दबाव की वजह से विवश हो कर अपना जीवन जीने के लिए और जीवन जरुरी साधनो की कमी को पूरा करने के लिए बच्चो को मजबूरन ये काम करना पड़ता है और दुःख की बात तो ये है की हमारे देश में ही नहीं होता बल्कि विदेशो में भी ऐसे कई किस्से पाए जाते है और ये हमारे लिए एक बहुत शर्म की बात है।

Child Labour Essay in Hindi
Bal Majduri | Child Labour Essay in Hindi

और इस समस्या के हल के लिए सारे नागरिको को जागृत होना चाहिए तभी हम इस व्यथा को दूर कर पाएंगे। बाल मजदूरी बच्चो से करवाया जाने वाला काम है जो किसी भी क्षेत्र में उनके मालिकों या घनिको द्वारा करवाया जाता है. वे लोग इन मासूम बच्चो की मज़बूरी का फायदा उठाते है और उनसे जबरजस्ती से काम करवाते है बचपन सभी बच्चो का जन्म सिद्ध अधिकार है जो माँ-बाप के प्यार से , उनकी देख रेख से सभी बच्चो को मिलता है और सभी बच्चो को मिलना भी चाहिए किन्तु उन मजबूर बच्चो के जीवन में कई सारी चीजों की कमियाँ होती है जिनकी वजह से वो काम करने को मजबुर हो जाते है उनका शारीरिक और मानसिक विकास , दिमाग का सम्पूर्ण विकास न होना सामाजिक और बौद्विक रूप से अस्वस्थ आदि हो जाते है।

इसकी वजह से बच्चे बचपन के प्यारे और खूबसूरत लम्हो से विमुख हो जाते है जो हर एक बच्चे के जीवन का यादगार और हसीन पल होता है। ये सारी बाधाए किसी भी बच्चे को साधारण बच्चे की तुलना में अलग रखती है जिनकी वजह से उनका मानसिक विकास रुक जाता है वो ख़तरनाक और किसी गैर मार्ग पर भी जा सकता है। इस बाल मजदूरी को रोकने के लिए कई सरे निति-नियम , कायदे-कानून बनाये है लेकिन फिर भी ये कृत्य बढ़ता ही जा रहा है।

बाल मजदूरी इंसानियत के लिए शर्म की बात है और ये एक बहोत बड़ा अपराध है जो हमारे देश , समाज , राष्ट्र बल्कि सभी के लिए एक श्राप है , और ये देश के विकास में बाधक रूप है। बचपन जीवन का सबसे यादगार और सीन पल हप्ता है जिसे हर बच्चे को जीने का जन्म सिद्ध अधिकार है।

Bal Majduri | Child Labour Essay in Hindi
Bal Majduri | Child Labour Essay in Hindi

बच्चो को अपने दोस्त बनाने का , उनके साथ खेलने का , स्कूल जाने का , मातापिता का प्यार, संस्कार और परवरिश का , उपरांत प्रकृति की संदरता का आनंद लेने का और इन सभी खूबसूरत पलो को जीने का पूरा अधिकार है. लेकिन केवल कुछ लोगो की वजह की गलत समझ और बेशर्मी की वजह से बच्चो कोअपने बचपन का त्याग करके मजबूरन ऐसा जीवन जीना पड़ता है। जीवन के कुछ जरूरी साधनो की पूर्ति के लिए उन्हें अपना हसीन बचपन कुर्बान करके ऐसी दुःखद परिस्थिति में जीना पड़ता है।

इन परिस्थियों में ज़्यादातर जिम्मेदार बच्चो के माँ-बाप ही होते है उनकी गैरज़िम्मेदारी और लापरवाही की वजह से ही बच्चों की ऐसी दशा होती है कई माँ-बाप अपने बच्चो को अपनी जागीर मानते है उन्हें अपने फायदे के लिए इतेमाल करते है , कोई पैसों की कमी की वजह से तो कोई जांनबुज कर ऐसा काम करवाते है। बच्चो की उम्र ये सब काम करने की नहीं होती वो मुस्कुराते हुए और खेलते हुए ही अच्छे लगते है , दोस्तों के साथ खेलना , बाते करना , कुछ नया सीखना , कुछ आदते को अपना ना , जिम्मेदार इंसान बनना , हसी मजाक और प्यार के भरा जीवन जीना आदि हर एक बच्चे के जीवन में ऐसे लम्हे होने आवश्य्क है। जिनकी वजह से उनका तन और मन शारीरिक और मानसिक रुप से स्वस्थ रहे। जो देश के उज्जवल भविष्य के लिए अतिआवशयक है।

माता-पिता को परिवार की जिम्मेदारियाँ खुद लेनी चाइये और अपने बच्चो को उनका बचपन बहुत सारा प्यार , अपनापन और अच्छी परवरिश के साथ जीने
देना चाहिए। सारी दुनिया में बल मजदूरी के लिए मुख्य कारण माता-पिता की लापरवाही , गरीबी , बेरोजगारी ,अनुचित जीवनशैली , तथा सामाजिक अन्याय , स्कूलों की कमी , अप्रभावशाली कानून और गैरसमज है जो देश के विकास को रोक देता है।

#निबंध 2

६ से १४ साल तक के भी कई बच्चो को इतनी छोटी सी उम्र में काम करना पड़ता है। विकासशील देशो में बच्चे अपना जीवन जीने के लिए बहोत कम पैसो में भी कड़ी महेनत करने के लिए मजबूर होते है। न तो वो अपने दोस्तों के साथ खेल सकते है और न तो अपने बचपन को सही तरीके से जी सकते है , न तो वो अमीर बच्चो की तरह अपने माँ-बाप का प्यार प् सकते हेयर नहीं अच्छी परवरिश। लेकिन दुःख की बात तो ये है की उन्हें अपने हर सपने , हर इच्छाओ का गला घोट के लाचारी और बेबसी के साथ जीना पड़ता है।

विकासशील देशो में , शिक्षा के लिए कम जागरूकता , गरीबी और निरक्षरता की वजह से बल मजदूरी की घटनाएँ बहुत अधिक बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में अपने माता-पिता के साथ कृषि में बहोत ही छोटी छोटी उम्र के बच्चे भी देखने को मिलते है। सारे विश्व में सभी देशो में बल मजदूरी का सबसे मुख्य कारण गरीबी , नीरक्षरता और स्कूलों की कमी है।

Bal Majduri | Child Labour Essay in Hindi
Bal Majduri | Child Labour Essay in Hindi

बचपन सबके जीवन का सबसे आनंदमय और खुशनुमा अनुभव बन जाता है क्योकि बचपन बहुत आवश्यक और दोस्ताना पल होता है सिखने का। अपने माता-पिता से बच्चों को पूरा अधिकार होता है जैसे की , खास देख-रेख पाने का, प्यार और परवरिश का, स्कूल जाने का, दोस्तों के साथ खेलने का और दूसरे खुशनुमा और आहलादक पलों का लुफ्त उठाने का। बल मजदूरी रोज ब रोज न जाने किते मासूम बच्चो का जीवन बिगड़ रहा है ये कृत्य बहुत ही शर्मजनक और गैर-कानूनी है जिसके सामने आवाज उथ नी चाहिए और ये कृतीय पर प्रतिबंध लगाना चाहिए या कठोर सजा सुनाई जानी चाहिए।

इस बुराई को पुरे विश्व से दूर करने के लिए हम जो भी प्रयत्न करते है वो सभी असफल हो जा रहे है। इतनी छोटी सी आयु में उनके साथ क्या हो रहा है और क्यों हो रहा है इस बात का अहसास करने के लिए वो बहुत ही नादान ,प्यारे और मासूम है। वो इस बात को समज ने के लिए इस उम्र के हिसाब से सक्षम नहीं है की वो समज सके की क्या गलत है और क्या गैर-कानूनी है,बल्कि वो तो अपनेद कामो की छोटी सी कमाई से भी खुश हो जाते है। और इसकी वजह से अनजाने में वो अपनी रोजाना की छोटी सी कमाई में ही रूचि रखने लगता है और अपना पूरा जीवन और आने वाले भविष्य भी ऐसे ही चला ते रहते है।

#निबंध 3

बच्चे देश की अमूल्य संपत्ति है जिन्हे हमे सुरक्षीत रखना चाहिए लेकिन इनके माता-पिता की गलत समज , गरीबी और पैसो की कमी की वजह से जो बच्चे हमारे देश की शक्ति थी वो अब कमजोरी बनती जा रही है बच्चो के अच्छे भविष्य और कल्याण के लीयते समाज और सर्कार के द्वारा कई जागरूकता के कार्यक्रम किये जा रहे है लेकिन इसके बावजूद भी गरीबी रेखा के निचे जी रहरे बच्चो को मजबूरन रोज ये बाल मजदूरी करनी पड़ती है।

किसी भी देश के लिए बच्चे उगते हुए सूरज की चमकती हुई रोशनी की तरह होते है जबकि कुछ लोग पैसो की लालच में आकर या फिर अपने फायदे के लिए इन बच्चो को की खान में धकेल देते है और साथ ही देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते है। ये लोग निर्दोष और लाचार बच्चो के साथ खिलवाड़ करते है। जब की इसमें गलती बच्चों की नहीं है बल्कि उनके माँ-बाप की है जो अपने बच्चो के साथ ऐसा सुलूक होने देते है कई माँ-बाप की मजबूरन अपने बच्चे को ऐसा करने के लिए कहेते है। बल मजदूरी जैसे शर्मजनक कृत्य से बच्चो को बचाने की जिम्मेदारी देश के हर एक नागरिक की है। ये एक सामाजिक समस्या है जो काफी लंबे समय से चली आ रही है और इसे जड़ उखड फेखने की जरुरत है और इसके लिए देश का हर एक नागरिक जागृत होना चाहिए अगर देश के सभी लोग सहयोग दे तो हम इस समस्या का हल कर सकते है और इसे सदा के लिए बंध कर सकते है।

Bal Majduri | Child Labour Essay in Hindi
Bal Majduri | Child Labour Essay in Hindi

असह्यय गरीबी और स्कूलो की कमी की वजह से बहुत सरे देशो में बल मजदूरी की घटनाएँ आये दिन बढ़ती ही जा रही है। बाल मजदूरी की उच्च दर अभी भी 50% से अधिक है जिसमें 5 से 14 साल तक के बच्चे भी काम कर रहे है। कृषि क्षेत्र में बाल मजदूरी की दर सबसे ज्यादा है , जो ज्यादातर ग्रामीण और अनियमित शहरी अर्थव्यवस्था में दिखाई देती है जहाँ के अधिकत्तर बच्चे अपने दोस्तों के साथ खेलने और स्कूल भेजने के बजाए प्रमुखता से अपने माता-पिता के द्वारा कृषि कार्यों में लगाये गये है। बाल मजदूरी का मुख्य कारण गरीबी और निरक्षरता है।

बाल मजदूरी की ये विकत समस्या ने अब वैश्विक रूप ले लिया है क्योकि अब ये देश के विकास और वृद्धि में भी बाधाए ला रही है स्वस्थ बच्चे किसी भी देश के लिये उज्जवल भविष्य और देश की अमूलय संपत्ति होती है।

देश आजाद होने के बाद , इस समस्या को जड़ से उखाड़ने के लिए कई कायदे-कानून बनाये गए लेकिन कुछ भी साबित नहीं हुवा। इसके कारन बच्चो का शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और बौद्धिक तरीके से विकास रुक गया। बच्चे प्रकृति की बनायीं एक प्यारी सी और मासूम कलाकृति है लेकिन ये बिलकुल भी उचित नहीं है की बुरी परिस्थियों की वजह से बिना सही उम्र में पहुंचे इतना कठिन श्रम करना पड़े। कुछ बछ्कों की मजबूरिया होती है तो कुछ बच्चे किसी धनिक या मालिकों के दर की वजहसे अपनी साडी खुशियो का गला घोट के ऐसी काली मजूरी करते है।

Bal Majduri | Child Labour Essay in Hindi
Bal Majduri | Child Labour Essay in Hindi

असह्यय गरीबी और स्कूलो की कमी की वजह से बहुत सरे देशो में बल मजदूरी की घटनाएँ आये दिन बढ़ती ही जा रही है। बाल मजदूरी की उच्च दर अभी भी 50% से अधिक है जिसमें 5 से 14 साल तक के बच्चे भी काम कर रहे है। कृषि क्षेत्र में बाल मजदूरी की दर सबसे ज्यादा है , जो ज्यादातर ग्रामीण और अनियमित शहरी अर्थव्यवस्था में दिखाई देती है जहाँ के अधिकत्तर बच्चे अपने दोस्तों के साथ खेलने और स्कूल भेजने के बजाए प्रमुखता से अपने माता-पिता के द्वारा कृषि कार्यों में लगाये गये है। बाल मजदूरी का मुख्य कारण गरीबी और निरक्षरता है।

बाल मजदूरी की ये विकत समस्या ने अब वैश्विक रूप ले लिया है क्योकि अब ये देश के विकास और वृद्धि में भी बाधाए ला रही है स्वस्थ बच्चे किसी भी देश के लिये उज्जवल भविष्य और देश की अमूलय संपत्ति होती है। और इतना ही नहीं बाल मजदूरी बच्चे के साथ देश को भी नुकसान पहुँचाती है इसकी वजह से देश के भविष्य का तो नुकसान होता ही है और बच्चो के बचपन को भी छीन लेता है। उपरांत कई बच्चे तो कई सारी ख़राब आदतो का शिकार हो जाते है और ये ख़राब आदते उनके जीवन को नर्क बना देता है. हमे इस बल मजदूरी के कृत्य को रोकना चाहिए। यदि हम सब मिलकर इस समस्या को हल करेंगे तो अवश्य ही इसको जड़ से उखाड कर फेक शकेंगे। हमे आने देश के बच्चो को ऐसी ख़राब आदतों से बचने के लिए और देश के भविष्य के लिए कुछ न कुछ उपाय निकलना होगा।

बाल मजदूरी पर निबंध | Child Labour Essay in Hindi

बच्चे देश की अमूल्य संपत्ति है जिन्हे हमे सुरक्षीत रखना चाहिए लेकिन इनके माता-पिता की गलत समज , गरीबी और पैसो की कमी की वजह से जो बच्चे हमारे देश की शक्ति थी वो अब कमजोरी बनती जा रही है बच्चो के अच्छे भविष्य और कल्याण के लीयते समाज और सर्कार के द्वारा कई जागरूकता के कार्यक्रम किये जा रहे है लेकिन इसके बावजूद भी गरीबी रेखा के निचे जी रहरे बच्चो को मजबूरन रोज ये बाल मजदूरी करनी पड़ती है।

किसी भी देश के लिए बच्चे उगते हुए सूरज की चमकती हुई रोशनी की तरह होते है जबकि कुछ लोग पैसो की लालच में आकर या फिर अपने फायदे के लिए इन बच्चो को की खान में धकेल देते है और साथ ही देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते है। ये लोग निर्दोष और लाचार बच्चो के साथ खिलवाड़ करते है। जब की इसमें गलती बच्चों की नहीं है बल्कि उनके माँ-बाप की है जो अपने बच्चो के साथ ऐसा सुलूक होने देते है कई माँ-बाप की मजबूरन अपने बच्चे को ऐसा करने के लिए कहेते है।

बल मजदूरी जैसे शर्मजनक कृत्य से बच्चो को बचाने की जिम्मेदारी देश के हर एक नागरिक की है। ये एक सामाजिक समस्या है जो काफी लंबे समय से चली आ रही है और इसे जड़ उखड फेखने की जरुरत है और इसके लिए देश का हर एक नागरिक जागृत होना चाहिए अगर देश के सभी लोग सहयोग दे तो हम इस समस्या का हल कर सकते है और इसे सदा के लिए बंध कर सकते है।

Bal Majduri | Child Labour Essay in Hindi
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देश आजाद होने के बाद , इस समस्या को जड़ से उखाड़ने के लिए कई कायदे-कानून बनाये गए लेकिन कुछ भी साबित नहीं हुवा। इसके कारन बच्चो का शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और बौद्धिक तरीके से विकास रुक गया। बच्चे प्रकृति की बनायीं एक प्यारी सी और मासूम कलाकृति है लेकिन ये बिलकुल भी उचित नहीं है की बुरी परिस्थियों की वजह से बिना सही उम्र में पहुंचे इतना कठिन श्रम करना पड़े। कुछ बछ्कों की मजबूरिया होती है तो कुछ बच्चे किसी धनिक या मालिकों के दर की वजहसे अपनी साडी खुशियो का गला घोट के ऐसी काली मजूरी करते है।

असह्यय गरीबी और स्कूलो की कमी की वजह से बहुत सरे देशो में बल मजदूरी की घटनाएँ आये दिन बढ़ती ही जा रही है। बाल मजदूरी की उच्च दर अभी भी 50% से अधिक है जिसमें 5 से 14 साल तक के बच्चे भी काम कर रहे है। कृषि क्षेत्र में बाल मजदूरी की दर सबसे ज्यादा है , जो ज्यादातर ग्रामीण और अनियमित शहरी अर्थव्यवस्था में दिखाई देती है जहाँ के अधिकत्तर बच्चे अपने दोस्तों के साथ खेलने और स्कूल भेजने के बजाए प्रमुखता से अपने माता-पिता के द्वारा कृषि कार्यों में लगाये गये है। बाल मजदूरी का मुख्य कारण गरीबी और निरक्षरता है।

बाल मजदूरी की ये विकट समस्या ने अब वैश्विक रूप ले लिया है क्योकि अब ये देश के विकास और वृद्धि में भी बाधाए ला रही है स्वस्थ बच्चे किसी भी देश के लिये उज्जवल भविष्य और देश की अमूलय संपत्ति होती है। और इतना ही नहीं बाल मजदूरी बच्चे के साथ देश को भी नुकसान पहुँचाती है इसकी वजह से देश के भविष्य का तो नुकसान होता ही है और बच्चो के बचपन को भी छीन लेता है।

Bal Majduri | Child Labour Essay in Hindi
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उपरांत कई बच्चे तो कई सारी ख़राब आदतो का शिकार हो जाते है और ये ख़राब आदते उनके जीवन को नर्क बना देता है. हमे इस बल मजदूरी के कृत्य को रोकना चाहिए। यदि हम सब मिलकर इस समस्या को हल करेंगे तो अवश्य ही इसको जड़ से उखाड कर फेक शकेंगे। हमे आने देश के बच्चो को ऐसी ख़राब आदतों से बचने के लिए और देश के भविष्य के लिए कुछ न कुछ उपाय निकलना होगा।

बाल मजदूरी कर रहे बच्चो के माता-पिता या गरीबी रेखा से नीचे जीवन जी रहे लोग अपने बच्चों की शिक्षा का खर्च वहन नहीं कर पाते है और अपना गुजरान चलने के लिये भी जरुरी पैसा भी नहीं कमा पाते है। इसी वजह से वो अपने बच्चों को स्कूल भेजने के बजाए कठिन श्रम में शामिल कर लेते है। ताकि उनके जीवन जरूरियात की चीजे ले सके और ये हमारे देश के लिए बहुत ही शर्मजनक बात है।

उपसंहार:

वो मानते है कि बच्चों को स्कूल भेजना समय की बरबादी है और कम उम्र में पैसा कमाना परिवार के लिये अच्छा होता है। अमीरों को गरीबों की मदद करनी चाहिए जिससे उनके बच्चे सभी जरुरी चीजें अपने बचपन में पा सके। इसको जड़ से मिटाने के लिये सरकार को कड़े कायदे-कानून बनाने चाहिए। और उन्हें कठिन रूप से पालन भी करवाना चाहिए। जो बी ऐसे छोटे बच्चो से बल मजदूरी करवाते है उन्हें कड़ी से कड़ी सजा देनी चाहिए।

मेरा नाम निश्चय है। में इसी तरह की हिंदी कहानिया , निबंध और सोशल मीडिया से संबंधित आर्टिकल लिखता हु। यह आर्टिकल “बाल मजदूरी पर निबंध | Child Labour Essay in Hindi” अगर आपको पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करे और हमे फेसबुक , इंस्टाग्राम आदि में फॉलो करे।

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