जंगल की चुड़ैल – Real ghost stories in Hindi

जंगल की चुड़ैल – Real ghost stories in Hindi

जंगल की चुड़ैल – Real ghost stories in Hindi : एक दिन की बात हैं , ठंडी का समय चल रहा था घना छाया था सारे लोग कार्यालय से आपना -आपना काम जल्दी निपटा कर निकल रहे थे। नानाजी नामक एक व्यक्ति बड़े सरकारी अधिकारी में एक थे ! सद्धर लोगो का अमीन काम उस समय नानाजी के द्वारा होता था। हररोज की तरह वो आपना पूरा काम निपटा कर घर जाने के लिए निकल रहे थे। रस्ते में बाजार से नानाजी को सामान की खरीदी भी करनी थी तो नानाजी आपने साथिओ से जुदा हो गए। उनको घर के जरूरी सामान खरीदना था उसके लिए उन्होंने अपनी गाड़ी उस ओर आगे बढ़ा दी ! आगे चलते उन्हें कुछ मछली बाजार लिखा , नानाजी मछली खरीदने हेतु गाड़ी से उतर गए ! मछली की जांच और खरीदने में काफी समय चला गया ! अचानक उसकी नज़र घडी पर पड़ी , उन्हें लगा की घर पहुंचने में आज बहुत देर हो जाएगी! उसने यह सोच कर जंगल की ओर जाने वाला रास्ता चुन लिया ! रात्रि का दूसरा पहर चल रहा था। अचानक उन्होंने गाड़ी को ब्रेक लगा दी, क्युकी उसके गाड़ी के आगे एक औरत ज़ोर ज़ोर से रो रही थी।

वीरान सड़क पर एक अकेली औरत क्या कर रही है , नानाजी को लगा की सायद कोई मजदूर की पत्नी होगी , जो अपने पति से खफा हो कर भाग आयी होगी। नानाजी गाड़ी से उतरे ओर उस औरत को पूछा “इस वक्त अकेली यह वीरान सड़क पर क्या कर रही हो!!” औरत ने कोई भी जवाब नहीं दिया और वापिस रोने लगी ! पुरे जंगल में रोने की आवाज गूंज रही थी।

जंगल की चुड़ैल - Real ghost stories in Hindi
जंगल की चुड़ैल – Real ghost stories in Hindi

नानाजी ने उसके घर के बारे में पूछते हुए कहा की तुम कहा रहती हो !!
उस औरत ने कोई जवाब नहीं दिया।

नानाजी ने सुझाव देते हुए कहा , आज रात मेरे घर पर रहना सुबह आपने घर चली जाना।

यह जंगल हिंसक जानवरो से भरा पड़ा हैं , मेरे घर चलो सबके लिए रसोई कर देना आजके दिन फिर अपने घर वापिस चली जाना ! यह सुन कर वह औरत तैयार हो गई।


बड़ा सा घूँघट डाला हुआ था , जिसकी वजह से चेहरा दिख नहीं पाया ! कुछ ही देर में घर पर पहुंच गए ! नानाजी के घरवाले उसकी रह देख रहे थे।

घर पर गाड़ी रुकते ही पापा ने कहा आज तो बहुत ही लेट आये हो घर के सारे लोग आ गए हैं! पापा का ये प्रश्न सुनने के बाद उन्होंने अपनी माँ को सारी बात विस्तार से बताई और माँ को कहा “माँ , आज रात का खाना ये बनाएगी , सुबह होते ही घर चली जाएगी “
बिचारि इतनी रात गए जंगल में भटके यह सोच कर मैं घर ले आया। नानाजी के पिता को संदेह था की ये औरत चोरी करने हेतु तो नहीं आयी। उसने सोचा की खाना बनाते समय या फिर सबके सो जाने के बाद कही सामान तो नहीं चोरी करेगी !!आपने बेटे की बात न टालते हुए कहा , आज रात यहा पर रहलो कल सुबह होते ही चली जाना।थोड़े रुवाब में आकर कहा कि , जाओ रसोई में से सामान लेकर खाना बना दो। उस औरत ने कोई जवाब नहीं दिया ! एक ही आवाज सुनाई दे रही थी वो थी हूँ हूँ हूँ !सारा सामान लेकर माँ के पीछे बहुत दूर गइ।फिरसे माँ ने उची आवज में खाना बनाने का हुक्म दिया ! और हुक्म देने के बाद माँ चली गई ! परंतु नानाजी की माँ का मन थोड़ा परेशान था ! १० मिनिट के बाद माँ से रहा न गया ओर वो उस औरत का चहेरा देखने हेतु रसोईघर में गई।
लेकिन ……………………………………

नानाजी की माँ रसोईघर में पहुची तो उन्होंने देखा की वो अभी मछलियों का थैला निकाल रही थी!
यह देखकर उससे रहा नहीं गया ओर बहुत गुस्सा होकर बोली ,घर के सभी लोग खाना खाने के लिए बेताब हो रहे हे और तुम हो की अभी तक मछलियाँ ही निकाल रही हो कल सुबह हो जाएगी क्या खाना पकाने में ?
औरत ने अभी तक चहेरा घूँघट से ढका हुआ था , चहेरा देखना लगभग अशक्य ही था !
नानाजी की माँ ने औरत से कहा तुम जल्दी से खाना बनाने की तैयारी करो मैं तुम्हे आग सुलगा देती हूँ तुम्हारा काम आसान हो जाएगा !
और वे जल्दी से चूल्हा जलाने का आपना काम करने लगी !
साथ ही उसका चेहरा देखने का प्रयास भी कर रही थी !
लेकिन वो जितना देखने की चेष्टा करती थी , औरत आपना चेहरा पल्लू से उतना ही ढक लेती थी ! नानाजी की माँ ने अंत मे हार मान ली और बोली मैने आग सुलगा दी हैं अब सारा काम तुम कर कर लो !

जंगल की चुड़ैल - Real ghost stories in Hindi
जंगल की चुड़ैल – Real ghost stories in Hindi

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जाते जाते कहा कुछ ज़रूरत हो तो मुझे बुला लेना ! औरत ने कोई जवाब न दिया ! नानाजी की माँ को लगा अब यहा ना जाने में ही भलाई हैं ! खामखा मेरा भी समय भी बर्बाद होगा और हो सकता हैं औरत अनजान लोगो के साथ बात कर ने में हिचकिचा रही हो !
ये सब मन ही मन सोच कर उन्होंने औरत से कहा की मैं थोड़ी देर में आ रही हूँ समय का लिहाज़ करते हुए जल्दी से खाना बना कर रखना !
और नानाजी की माँ रसोईघर से निकल गई !
लेकिन उसका मन अभी भी परेशान ही था !
मन में संकोच लिए हुए अपने कमरे , कभी बच्चों के कक्ष में जाख रही थी , कहीं कुछ आपात ना आ जाए!
चिंता मन ही मन खाए जा रही थी ,एक मिनट भी मन को शांति नहीं थी !
उसके लिए समय थम सा गया था , पाँच मिनट भी उसे पर्वत सामान लग रही थी !
समय आगे ही नहीं बढ़ रहा था !
आठ मिनट बड़ी मुश्किल से बीते और वह तुरंत ही रसोईघर की तरफ दौड़ी !
जैसे ही वो रसोईघर पहुंची, वहा का नज़ारा देखा तो उनकी आँखे फटी की फटी रह गई ! उनके पैरो तले जमीन खिसक गई थी !

माताजी की धडकने रुकने पर आ गई थी ! उन्होंने देखा की औरत रसोईघर मे बैठे हुए कच्ची मछलिया खाए जा रही थी !
पुरे रसोईघर में मछलियाँ और मछलियों का खून दिखाई दे रहा था ! औरत के सिर से घूँघट भी उत्तर गया था !
यह खौफनाक औरत का चेहरा देख कर उसकी की हालत ख़राब हो गइ थी , क्युकी आज तक उन्होने ऐसा डरावना चेहरा नहीं देखा था !
नाख़ून , औरत के बाल सब बढ़े हुए थे !

जंगल की चुड़ैल - Real ghost stories in Hindi
जंगल की चुड़ैल – Real ghost stories in Hindi

औरत पूरी तरह से मछलियाँ खाने मे व्यस्त थी जिस वजह से औरत का माँ की तरफ कुछ ध्यान भी नहीं था ! औरत के मुँह से एक ही आवाज आ रही थी वो थी , हूँ हूँ !! पुरे रसोईघर में गूंज रही थी ! रसोईघर घर के पीछेवाले हिस्से में होने के कारन घर के सदस्यों का ध्यान रसोईघर की तरफ नहीं जा रहा था ! माँ कुछ भी न समझते हुए सुन हो गइ थी , अगर वो चिल्लाती तो घर के लोगों को नुकसान पहुंचने का डर था ! वो इस चुड़ैल से अपने घर के सदस्यों को कैसे बचाए यह समझ नहीं पा रही थी ! एक ही नाम उसके जहन में आ रहा था वो था भगवान का नाम ! अचानक वो औरत नानाजी की माँ की और आगे बढ़ने लगी थी ! और तुरंत ही से एक थाल लिया और वो चूल्‍हे की ओर दौड़ी ! उस चुड़ैल की नज़र भी पापा पर पड़ी और वो कुछ सोचकर अपनी जगह से उठी!

माँ ज्यादा देर नहीं करना मांगती थी , नानाजी की माँ जानती थी की आज कोई भी लापरवाही हुई तो कुछ भी हो सकता हैं !
उस औरत के कुछ भी करने से पहले उन्हे रसोईघर के चूल्‍हे तक पहुचना था !
किसी भी तरह वो चूल्‍हे के पास पहुंची और चूल्हे मे से उन्होने जलता कोयला एक थाल मे भर लिया !
और उस चुड़ैल की तरफ जोर से फेंका !
कोयले की वजह से जलन की वो अजीब गरीब डरावनी आवाज़े निकालने लगी !
उस औरत की आवाजे बहार तक सुनाई देने लगी सारे घर के लोग बाहर से रसोईघर की तरफ भागे !

वो चुड़ैल ज़ोर तरह तरह की आवाजे निकल रही थी और माताजी को पकड़ने हेतु पुरे रसोईघर में भाग रही थी ! लेकिन अभी तो सारे घरके सदस्यों रसोईघर में पहुंच चुके थे ज्यादा लोग इक्कठा होने की वजह से चुड़ैल डर गई ! लोंगों की भीड़ से किसी तरह बचके वो वापस जॅंगल की तरफ दौड़ने लगी। और सारे घर के लोग और आसपास के लोग ये भयानक दृश्य देख कर डरे हुए चुप चाप खड़े थे ! और सभी लोग मन हीं मन नानाजी की माँ ने जो हिम्मत दिखाई उसे दाद दे रहे थे! इस तरह से जंगल की चुड़ैल से छूटकारा मिला !

मेरा नाम निश्चय है। में इसी तरह की हिंदी कहानिया , हिंदी चुटकुले और सोशल मीडिया से संबंधित आर्टिकल लिखता हु। यह आर्टिकल “जंगल की चुड़ैल – Real ghost stories in Hindi– Real ghost stories in Hindi” अगर आपको पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करे और हमे फेसबुक आदि में फॉलो करे।

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